Bazaru Hun Mai by Shayariwala

कमली वैश्या :


हाँ बाज़ारू हूं मैं, तो क्या हुआ ?

तू आया मेरी चौखट पे

और फिर एक रात मे,

यूँ महकी मैं तेरी चाहत से ??

और फिर पूछते हो, के क्यूँ

बाजारू हूं मैं …!!


ऐसे कैसे कोई जिस्म के साथ,

दिल भी खरीद सकता है ??

आहों की जगह कोई

सांसो की ताकत बन सकता है..!!

पहले एक बेबसी

फिर आदत

फिर लत बन जाती हूँ

वैश्या छिनाल कसबी मंगलामुखी

कई नामों से जानी जाती हूँ ….

फिर एक दिन मेरे घर की मिट्टी से

दुर्गा की मूर्ति बन जाती हूँ


मेरी जिंदगी की बस एक रीत है

मैं झुक जाऊँ और तुम्हारी जीत है


जिंदगी जला रहीं है थोड़ा जल लेने दो

अभी जिंदा है तो जी, चल लेने दो…


था पैसे का वादा..!! है हमारा ख्वाब आधा..?


सीने को ना बेचती , बाजारू हूं ? कमीने, तो

हूं मैं वारांगना, वीरांगना बन के जीने दो


आप ये तो पूछो,

क्यू कहलाती मैं बाजारू

क्यू होठों की का व्यापार,

कोठो का बाज़ार है

मेरी जिंदगी


फिर कहते हो कि हमारा साथ रहना मुश्किल है

और फिर एक रात मे,

क्यूँ चहकी मैं तेरी आहट से ??

और फिर पूछते हो, के के के

क्यूँ बाज़ारू हूं मैं …!!


शायरीवाला :


बेशक मेरा भी दिल धड़का है तुम्हारे लिए

बेशक मुझे भी चाहत है

तुम्हारी मौसम से

तुम्हारी आदत से

तुम्हारी महक से

तुम्हारी आहट से


पर ये समाज मेरा घर मेरे पिताजी…….


हमारा साथ रहना मुस्किल है

तुम बाजारू हो , तो क्या हुआ ?

मैं आया हूं तेरी चौखट पे….


फिर मेरी काग़ज़ की सफेदी,

तुम्हारी सादगी से संवर जाएगी

मेरी चाहत की रंगरेजी,

तुम्हारे रंगों से निखर जाएगी


….. … ……. …. …….


सुनो हमारी कहानी सायद यहि तक सही है

किसी ने, हमारी जवानी सायद यहि तक कहीं है


काश मैं भी बाजारू बन सकता

और फिर हम हमेशा साथ रह सकते


फिर काश मैं भी कह पाता, कमली…


" बाज़ारू हूं मैं "



Written By Shayariwala ( Indra Verma )


Declaration

Any resemblance to real persons or other real-life entities is purely coincidental. All characters and other entities appearing in this work are fictitious.


Picture Credit

G. M. B. AKASH

Photos: Luminous portraits of Bangladesh’s teenage prostitutes

https://qz.com/659240/photos-luminous-portraits-of-bangladeshs-teenage-prostitutes/amp/

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